Friday, 28 July 2017

राजपुताना के रीति  रिवाज जिनकी जानकारी हमारे लिए  आवश्यक है।        

         
1.) अगर आप के पिता जी /दादोसा बिराज रहे है तो कोई भी शादी ,फंक्शन, मंदिर आदि में आप के कभी भी लम्बा तिलक और चावल नहीं लगेगा, सिर्फ एक छोटी टीकी लगेगी !!
2.) जब सिर पर साफा बंधा होता है तो तिलक करते समय पीछे हाथ नही रखा जाता, हां ,सर के पीछे हाथ तभी रखते है जब आप नंगे  
सर हो, तो सर ढकने के लिए हाथ रखें।
3.) पिता का पहना हुआ साफा , आप नहीं पहन सकते
4.) मटिया, गहरा हरा, नीला, सफेद ये शोक के साफे है
5.) खम्मा घणी  का असली मतलब है "माफ़ करना में आप के सामने बोलने की जुरत कर रहा हूं,  जिस का आज के युग में कोई मायने नहीं रहा गया है !!
6.) असल में खम्माघणी , चारण, भाट, राज्यसभा मे ठिकानेदार / राजा /महाराजा के सामने कुछ बोलने की आज्ञा मांगने के लिए use करते थे.
7.) ये सरासर गलत बात है की घणी खम्मा, खम्मा-घणी का उत्तर है, असल में दोनों का मतलब एक ही है !!
8.) हर राज के, ठिकाने के, यहाँ clan/subclan के इस्थ देवता होते थे, जो की जायदातर कृष्ण या विष्णु के अनेक रूपों में से होते थे, और उनके नाम से ही गाँववाले या नाते-रिश्तेदार आप का greet करते थे, जैसे की जय रघुनाथ जी की , जय चारभुजाजी की...जय गोपीनाथ जी की ।
9.) पैर में कड़ा-लंगर, हाथी पर तोरण, नंगारा, निशान, ठिकाने का मोनो ये सब जागीरी का हिस्सा थे, हर कोई जागीरदार नहीं कर सकता था, स्टेट की तरफ से इनायत होते थे..!!
10.) मनवार का अनादर नहीं करना चाहिए, अगर आप नहीं भी पीते है तो भी मनवार के हाथ लगाके या हाथ में ले कर सर पर लगाके वापस दे दे, पीना जरुरी नहीं है , पर ना -नुकुर कर उसका अनादर न करे
11.) अमल घोलना, चिलम, हुक्का या दारू की मनवार, मकसद होता था, भाई, बंधु, भाईपे, रिश्तेदारों को एक जाजम पर लाना !!
12.)ढोली के ढोल को "अब बंद करो या ले जायो" नहीं कहा जाता है "पधराओ " कहते हैं।
13.) आज भी कई घरों में तलवार को म्यान से निकालने नहीं देते, क्योंकि तलवार की एक परंपरा है - अगर वो म्यान से बाहर आई तो या तो उनके खून लगेगा, या लोहे पर बजेगी, इसलिए आज भी कभी अगर तलवार म्यान से निकलते भी है तो उसको लोहे पर बजा कर ही फिर से म्यान में डालते है !!
14.) तोरण मारना इसलिए कहते है क्योकि तोरण एक राक्षश था, जिसने शिवजी के विवाह में बाधा डालने की कोशिश की थी और उसका शिवजी ने वध किया था
15.) ये कहना गलत है की माताजी के बलि चढाई, माताजी तो माँ है वो भला कैसे किसी प्राणी की बलि ले सकती है, दरअसल बलि माताजी के भेरू (शेर) के लिए चढ़ती है, उसको प्रसन्न करने के लिए.
जय राजपूताना 🗡

म्हारे जैसलमेर री शान






केसरीसिंह सूर्यवंशी की वाॅल से
जय जैसाण 👇👇👇


दो इंच की भैंस के चमड़े की रस्सी, जो 300फीट गहरे कुँए से पानी निकालने के काम आती थी, जिसे #बरत कहा जाता है को घुटनों पर लपेट कर तोड़ दिया।
स्वर्णमुद्रा को चुटकी से मसल कर चार इंच लम्बी पतरी में बदल दिया।
एक 20 किलो का बकरा अकेला ही एक समय के भोजन में खा गया।
आठ किलो गेहूँ आटा की रोटी खा कर कुछ और भी माँग रहा है।
30 बाजरी की रोटियां, जिनका वजन करीब 4किलो होगा.... एक समय की खुराक है और दिन में दो बार भोजन करते है।
20फीट ऊँची खेजड़ी को जड़ सहित उखाड़ लिया और नगर के मुख्यद्वार के सामने लाकर पटक दिया।
20व्यक्ति मिलकर भी पिटाई नहीँ कर सके। उसने पास के एक पेड़ को उखाड़ा और सबको पीट कर भगा दिया।
एक बार 12 व्यक्ति मिलकर घास काटने के लिए जंगल गए।रात को पहुँचे थे। तय हुआ कि अभी सो जाते है और सुबह उठकर काम में लगेंगे। किन्तु उन्होंने सुबह का भोजन रात को ही बनाकर रख दिया। आधी रात को एक व्यक्ति उठा, और सारा भोजन खा कर पूरे घास को काटकर वापिस सो गया।
एक आदमी ने रात को चलना शुरू किया। रास्ता भटक गया। सुबह वह अपने स्थान से 70किमी दूर था।
एक आदमी 250 ग्राम अफीम चट कर गया और मजे से घूम रहा था ।
एक आदमी ने इंग्लिश की 5 बोतलें खाली की और आराम से गाड़ी चलाकर घर पहुंचा।
एक बारात में एक लड़के ने 40बोतल बीयर पी ली...!
इनमें से एक भी बात गलत नहीँ है।
कुछ का तो मै प्रत्यक्षदर्शी भी हूँ। कोई अतिशयोक्ति नहीँ........बल्कि डरते डरते आंकड़ों में काट छांट कर कुछ कम ही लिखने का प्रयास किया है।
यदि इस प्रकार के लोगों से आपको साक्षात् करना है.....तो #जैसलमेर के देहात में जाइये।
और हाँ....एक ही मुक्के से खतरनाक युवा ऊँट को गिराने वाले अभी बहुत से मौजूद है।
इसलिए......इस अविश्वास का कोई कारण नहीँ बनता कि महाराणा प्रताप ने एक ही झटके से अश्वसहित सवार को बीच में से चीर दिया था।
#जय_जैसाण

Saturday, 27 May 2017

                                                            हमारा बचपन


*Please read*
😢  *very touching* 👇
जब  बचपन  था,  तो  जवानी  एक  ड्रीम  था...

जब  जवान  हुए,  तो  बचपन  एक  ज़माना  था... !!

जब  घर  में  रहते  थे,  आज़ादी  अच्छी  लगती  थी...
आज  आज़ादी  है,  फिर  भी  घर  जाने  की  जल्दी  रहती  है... !!
कभी  होटल  में  जाना  पिज़्ज़ा,  बर्गर  खाना  पसंद  था...
आज  घर  पर  आना  और  माँ  के  हाथ  का  खाना  पसंद  है... !!!
स्कूल  में  जिनके  साथ  ज़गड़ते  थे,  आज उनको  ही  इंटरनेट  पे  तलाशते  है... !!
ख़ुशी  किसमे  होतीं है,  ये  पता  अब  चला  है...
बचपन  क्या  था,  इसका  एहसास  अब  हुआ  है...
काश  बदल  सकते  हम  ज़िंदगी  के  कुछ  साल..
.काश  जी  सकते  हम,  ज़िंदगी  फिर  एक बार...!!
👘 जब हम अपने शर्ट में हाथ छुपाते थे और लोगों से कहते फिरते थे देखो मैंने अपने हाथ जादू से हाथ गायब कर दिए
|🌀🌀
✏जब हमारे पास चार रंगों से लिखने वाली एक पेन हुआ करती थी और हम सभी के बटन को एक साथ दबाने की कोशिश किया करते थे |❤💚💙💜
👻 जब हम दरवाज़े के पीछे छुपते थे ताकि अगर कोई आये तो उसे डरा सके..👥
👀जब आँख बंद कर सोने का नाटक करते
थे ताकि कोई हमें गोद में उठा के बिस्तर तक पहुचा दे |
🚲सोचा करते थे की ये चाँद हमारी साइकिल के पीछे पीछे क्यों चल रहा हैं |🌙🚲
🔦💡On/Off वाले स्विच को बीच में
अटकाने की कोशिश किया करते थे |
🍏🍎🍉🍑🍈 फल के बीज को इस डर से नहीं खाते थे की कहीं हमारे पेट में पेड़ न उग जाए |
🍰🎂🍧🏆🎉🎁 बर्थडे सिर्फ इसलिए मनाते थे
ताकि ढेर सारे गिफ्ट मिले |
🔆फ्रिज को धीरे से बंद करके ये जानने की कोशिश करते थे की इसकी लाइट कब बंद होती हैं |
🎭  सच , बचपन में सोचते हम बड़े
क्यों नहीं हो रहे ?
और अब सोचते हम बड़े क्यों हो गए ?⚡⚡
🎒🎐ये दौलत भी ले लो.. ये शोहरत भी ले लो💕
भले छीन लो मुझसे मेरी जवानी...
मगर मुझको लौटा दो बचपन का सावन ....☔
वो कागज़ की कश्ती वो बारिश का पानी.. 🌊🌊🌊
..............
एक बात बोलु
इनकार मत करना
ये *msg* जीतने मरजी लोगों को *send* करो
जो इस *msg* को पढेगा
उसको उसका बचपन जरुर याद आयेगा.
क्या पता वो आपकी वजह से अपने बचपनमें चला जाए. चाहे कुछ देर के लीए ही सही।
और ये आपकी तरफ से   उसको सबसे अच्छा गिफ्ट होगा.
*So do it.....*😊
*Special Doston Ko Snd Kro*

Tuesday, 23 May 2017

कहानी एक राजपूत सरदार री

(इस मार्मिक गाथा को हर राजपूत शेयर करे )

गोडवाड के किसी गाँव का गरीब मेड़तिया राठौर नौजवान पर आज वज्र टूट पड़ा जब सुसराल से पत्र आया की एक हज़ार रूपए ले कर जेष्ठ सुक्ल दूज को लग्न करने आ जाना, यदि रूपए नहीं लाये और निश्चित तिथि को नहीं पहुचे तो कन्या को किसी और योग्य वर से विवाह करा दिया जायेगा,
कोई रास्ता ना देख पाली के बनिए के पास गया और मदद मांगी, बनिए ने पुछा “कुछ है गिरवी रखने को “ वो ठेरा गरीब राजपूत कहा से लाता,
बनिए ने कागज़ में कुछ लिखा “लो भाई,इस पर हस्ताक्षर कर दो, कागज पढ़ नौजवान के हौश उड़ गए, कागज पर लिखा था “जब तक एक हज़ार रूपए अदा नहीं करू तब तक अपनी पत्नी को माँ –बहन समझुगा ! मरता क्या नहीं  करता अपने कलेजे पर पत्थर रखकर हस्ताक्षर किये और एक हज़ार रूपए अपने साफे में बांध सुसराल चल पड़ा,
जेष्ठ सुक्ल दूज को सूर्यादय के समय नवयुवक अपने सुसराल पहुचा,हज़ार रूपए की थेल्ली अपने ससुर के सामने रखी,धूमधाम से लग्न हुआ, नवयुवक अपनी नयी दुल्हन को बैलगाड़ी पर बिठा कर अपने घर की और चल पड़ा 
बिन सास ससुर, देवर ननद का ये सुनसान झोपड़ा, कोई नयी दुल्हन का स्वागत करने वाला नहीं, नयी दुल्हन ने हाथ में झाड़ू थमा और लगी अपनी नयी दुनिया सवारने, रात्री को नयी दुल्हन ने अपने हाथ से बनाया गरम भोजन अपने स्वामी को जिमाया, पीहर से लाये नरम रुई के गद्दे से सेज सजाई, कोने में तेल का दिया रखा, प्रीतम आया अपनी तलवार मयान से खैच कर,सेज के बीच में रखकर, करवट पलट कर सो गया !!
इस प्रकार एक के बाद एक अनेक राते बीतती गयी, क्षत्रानी  को ये पहेली कुछ समझ नहीं आई, कोई नाराजगी है या मेरी परीक्षा ले रहे है, कुछ समझ में नहीं आ रहा था, उस रात जब ठाकुर घर आया तो हिम्मत कर पूछ ही लिया “ठाकुर आप क्या मेरे पीहर का बदला ले रहे हो ? आखिर क्या है इस तलवार का भेद ??
राजपूत ने बनिए दुअरा लिखा पत्र आगे कर दिया “लो ये खुद ही पढ़ लो” जैसे जैसे क्षत्रानी ने पत्र पढ़ा वैसे वैसे उसकी आँखों में चमक आने लगी बोली वाह रे राजपूत, मेरा तुझ से ब्याहना सफल हो गया, धन्य हो मेरी सास जिसने आप को अपनी कोख से जनम दिया,
ये लो कहते हुए क्षत्रानी ने अपने सुहाग की चूडिया और अपने तन पर पहने गहने उत्तार कर अपने पति के सामने रख दिए,
बस इतना सा सब्र क्षत्रानी राजपूत बोला अपनी स्त्री के गहने से अपना वर्त छोड़ दू, ये नहीं हो सकता 
उतेजित ना हो स्वामी, इस सोने को बेच कर दो बढ़िया घोडिया खरीदो,बढ़िया कपडे सिलवाओ और हथियार लो,
दूसरी घोड़ी किसके लिए और कपडे हथियार किसलिए ??
मेरे लिए, जब में छोटी थी तो मर्दाने वस्त्र पहन कही बार युद्ध में गयी थी,तलवार चलानी भी आती है, हम दोनों मेवाड़ राज्य चलते है ,हम मित्र बन कर राणाजी के यहाँ काम करेगे और पैसे कमा कर बनिए का ऋण उतरेगे !
ठाकुर तो क्षत्रानी का मुह देखता ही रह गया
वेश बदलकर दोनों घुड़सवार मेवाड़ की तरफ निकल पड़े, मेवाड़ पहुच,दरबार में हाज़िर हुए, राणाजी में पुछा “कौन हो ,कहा से आ रहे हो,  हम दोनों मित्र है और मारवाड़ के मेड़तिया राठौर है, आप की सेवा के आये है 
राणाजी ने दोनों को दरबार में नौकरी पर रख लिया,
कुछ दिन बाद राणाजी शिकार पर निकले, दोनों क्षत्रय साथ में, हाथी पर बैठे राणाजी में शेर पर निशाना साधा, निशाना सही नहीं लगा,घायल शेर वापस मुडकर सीधा हाथी के हौदे की और लपका,दुसरे सिपाही समझ पाते उस से पहले ही  क्षत्रानी ने अपने भाले से शेर को बींध डाला,
राणाजी प्रसन्न हो पर उन दोनों को  अपने शयनकक्ष का पहरा देने हेतु नियुक्त कर दिया, 
वक़्त बीतता गया ,सावन का महिना आया , हाथ में नंगी तलवार लिए पहरा देते दोनों राजपूत, 
कड़कड कड़ बिजली क्रोधी, गड गड कर बादल गरजे, हाथ में तलवार लिए पहेरा देती क्षत्रानी अपनी पति को निहार रही है, विरह की वेदना झेल रही क्षत्रानी के मुह से अनायास मुह से दोहा निकल गया
देश वीजा,पियु परदेशा ,पियु बंधवा रे वेश !
जे दी जासा देश में, (तौदी) बांधवापियु करेश !
महारानी झरोखी में बैठी सुन रही थी ,
सुबह हुई, महारानी के दिल में बात समां नहीं रही थी उसने राणाजी से कहा इन राजपूत पहरियो में कोई भेद है, रात ये बिछुड़ने  की बात कर रहे थे हो ना हो इन में से एक पुरुष है और एक स्त्री है,
राणाजी को विश्वास नहीं हुआ,ये बहादुरी और वो भी स्त्री की ?
परीक्षा कर लो पता चल जायेगा !!
राणाजी ने दोनों को रानीवास में अन्दर बुलाया, महारानी ने दूध मंगवा कर आंगन के चुल्ले पर रख दिया और गर्म होने दिया,दूध में उफान आते ही क्षत्रानी चिल्ला पड़ी “अरे अरे दूध ..!!
ठाकुर ने अपनी कोहनी मार कर चेताया पर देर हो चुकी थी !
महारानी ने मुस्कुराते हुआ पुछा “बेटा ,तुम कौन हो, सच्ची बात बताओ तुम्हारे सभी गुनाह माफ़ है  गदगद कंठ से राजपूत ने सारी बात विस्तार से बताई .
वाह राजपूत वाह ! तुम धन्य हो ! आज से तुम मेरे बेटे-बेटी ,तुम यही रहो तुम्हरे रहने का बंदोबस्त महल में करवा देता हु ,बनिए के कर्ज के पैसे में अपने आदमियों से भिजवा देता हु 
महारानी अन्दर से बढ़िया पौशाक व् गहने लाकर क्षत्रानी को दिए !
दोनों की आँखों में कृत्यगता के आसू थे, हाथ जोड़ कर बोले “हजुर हम अपने हाथो से बनिए का कर्ज चूका कर हमारे लिखे दस्तावेज अपनी हाथो से फाड़े तभी हमारा वर्त छूटेगा 
राणाजी ने श्रृंगार की हुई  बैलगाडी से ,खुद सारा धन देकर उनको विदा किया  घर पहुच कर ,पहले बनिए के पास जा कर अपना कर्ज चुकाया और अपनी जमीन कर मुक्त कराई, उस रात इस राजपूत जोड़े ने अपनी सुहागरात मनाई
**श्री नाहर सिंह  जी जसोल की किताब से **

Saturday, 6 May 2017

पधारो म्हारे देश 

 

JAISALMER

 स्वर्ण नगरी जैसलमेर

रेत के समंदर में सफारी

मौसम गर्म हो रहा है। गर्म हो रही है थार के रेगिस्तान की रेत भी। लेकिन थार के पर्यटन वातावरण में गरमी हाल ही में एक और घटना से आई- और वह थी पहली डेजर्ट सफारी का उद्घाटन। यह हुआ जैसलमेर से 30 किलोमीटर दूर सम में। राजस्थान सरकार और राजस्थान पर्यटन की मदद से दुबई के लामा ग्रुप ने इस डेजर्ट सफारी की शुरुआत की है।
 
जैसलमेर रेगिस्तान तो है लेकिन शहर के आसपास आपको रेत के टीले उस तरह से नहीं मिलेंगे, जैसे आप फोटो या फिल्मों में देखते हैं। रेत का वह समुद्र देखने के लिए आपको जैसलमेर से 42 किलोमीटर दूर सम जाना पडेगा। सम सैंड ड्यून्स के लिए मशहूर हैं। यहां का अनुभव वाकई बिरला होता है। वैसा ही जैसे कोई दार्जीलिंग जाकर अलस्सुबह सूर्योदय देखने के लिए टाइगर हिल की ओर दौड पडता है या कन्याकुमारी में समुद्र में डूबते सूरज देखने को देखने के लिए जनसमुद्र उमड पडता है। सम सैलानी रेत में पिघलते सूरज को देखने के लिए जाते हैं। रेत का यही आकर्षण है कि अब कई होटल व रिजॉर्ट सम के आसपास बन गए हैं। लामा टूर्स एंड क्रूज प्राइवेट लिमिटेड की डेजर्ट सफारी ऐसे ही सम पर होती है। जैसलमेर से रवाना होकर सफारी सम के रेत टीलों के ठीक मुहाने पर पहुंचकर विराम लेती है- जीपों के टायरों की हवा कम करने के लिए।
 
लामा हैरिटेज विलेज
सफारी का असली अनुभव यहीं से शुरू होता है जब सम के सुनहरे टीलों पर आपकी जीप चढाइयां चढती और उतरती है। इसी सफर के बाद आप टीलों के बीचों-बीच स्थित लामा हैरिटेज विलेज में पहुंचते हैं। यहां बीचों-बीच का आशय रेगिस्तान के बीचों-बीच से कतई नहीं है क्योंकि सम से तो दरअसल थार के रेगिस्तान का अनंत विस्तार शुरू होता है। हां, लामा हैरिटेज विलेज उसका अहसास जरूर देता है क्योंकि वहां जहां भी आप नजर दौडाएं, रेत ही रेत नजर आती है। यह अनुभव वाकई अद्भुत होता है। उस पर अगर शाम को चांदनी छाई हो तो उसका सुरूर ही अलग होता है। वैसे लामा हैरिटेज विलेज में पहुंचने के बाद ऊंट की सवारी कर सकते हैं (रेगिस्तान में आकर उसका अनुभव न किया तो कोई फायदा नहीं), हुक्का आजमा सकते हैं या केवल राजस्थानी पोशाकें पहनकर फोटो खिंचा सकते हैं। अंधेरा गहराने लगे तो रावणहत्था की मदमस्त तानों और कालबेलिया नाच के बीच खालिस राजस्थानी खाने के स्वाद.. वाह, क्या बात है।
 
कुछ खास बातें
लामा की डेजर्ट सफारी में फिलहाल रात काटने की सुविधा नहीं है। लेकिन दो तरह की सफारी उपलब्ध हैं- डे सफारी जो सवेरे 9 बजे से 12 बजे तक होती है और ड्यून डिनर सफारी जो दोपहर साढे तीन बजे से लेकर रात साढे नौ बजे तक होती है। दिन की सफारी का किराया बडों के लिए ढाई हजार रुपये और बच्चों (3-10 साल) के लिए डेढ हजार रुपये है। वहीं शाम की सफारी में बडों का किराया साढे तीन हजार रुपये और बच्चों का ढाई हजार रुपये है। सफारी यूं तो जीपों पर होगी, लेकिन आप थोडा एडवेंचर करना चाहें तो क्वाड बाइक लेकर रेत पर बाइकिंग भी कर सकते हैं। रेगिस्तान का मजा लेने के लिए जैसलमेर जाने वाले देशी-विदेशी सैलानियों की कोई कमी नहीं। लेकिन डेजर्ट सफारी रेगिस्तान के रोमांच को एक नया आयाम जरूर देगी। अभी तो समूचे उत्तर भारत में गरमी तेजी पकड रही है, लिहाजा रेत में तपिश होगी। लेकिन अगले सीजन में इसे आजमाइएगा जरूर।

 

Wednesday, 26 April 2017

राजस्थान की सामान्य जानकारी

जब हम राजस्थान की बात करते हैं तो आपके जहन में क्या आता है ? सुन्दर महल, ऊंट की राजसी सवारी ? वीर किवदंतियां रोमांटिक कहानियाँ, जीवंत संस्कृति और आकर्षक विरासत? क्या यहां बताई गयी बातों में सिमट गया है राजस्थान शायद आप हां कहें । चाहिए कोई बात नहीं "राजाओं की भूमि" इससे कहीं अधिक है इससे कहीं विस्तृत है।
राजस्थान, एक अविश्वसनीय रूप से सुंदर राज्य भारत के उत्तर पश्चिम में मौजूद है जो अपने आप में कालातीत आश्चर्य का जीवंत उदहारण है, अगर व्यक्ति यात्रा का पारखी है तो उसे यहां जरूर जाना चाहिए। हम इस बात की पूरी गारंटी लेते हैं की वो कभी भी अपनी इस यात्रा को भूल नहीं पायेगा अतः वो यहां एक बार जरूर जाये। प्राचीन वास्तुकला एक चमत्कार के तौर पर राजस्थान को और भी अधिक रॉयल बनाती है जो राजस्थान रॉयल्स की समृद्धि का एक जीवंत उदाहरण है। राजस्थान का शुमार दुनिया की उन जगहों में है जो अपने यहाँ आने वालों को बहुत कुछ देता है । आइये विस्तार से राजस्थान के हर एक पहलुओं पर नज़र डाली जाये।
इस ऐतिहासिक राज्य की स्थलाकृति
देश के पश्चिमोत्तर की ओर स्थित, राजस्थान भारत गणराज्य में क्षेत्र से सबसे बड़ा राज्य है। ये राज्य भारत के 10.4% भाग को अपने में समेटे हुए है जिसमें 342,269 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र शामिल है। गुलाबी नगरी जयपुर यहाँ की राजधानी है जबकि अरावली रेंज में स्थित माउंट आबू राजस्थान का एकमात्र हिल स्टेशन है। राजस्थान का पश्चिमोत्तर भाग काफी शुष्क और रेतीले है जिसमें से अधिकांश भाग को थार रेगिस्तान ने कवर कर रखा है।
राजस्थान की जलवायु
राजस्थान में मौसम को 3 भागों में बांटा गया है  जिसमें  गर्मी, मानसून और सर्दियों शामिल हैं। पूरा राज्य केवल मॉनसून को छोड़कर बाकी सारे समय शुष्क और सूखा रहता है। राज्य गर्मियों में सर्वाधिक गर्म रहता है इस दौरान यहां का पारा 48 डिग्री तक चला जाता है। पूरे राज्य में केवल माउंट आबू ही वो स्थान है जहां गर्मियों के दौरान मौसम सुखद रहता है।
राजस्थान में आपको कौन सी भाषा सुनने को मिलती है ?
राज्य की मुख्य भाषा राजस्थानी है साथ ही यहां हिन्दी और अंग्रेजी का भी इस्तेमाल व्यापक पैमाने पर किया जाता है। साथ ही यहां की पुरानी पीढ़ी यानी की बुज़ुर्ग आज भी अपनी बोली में सिन्धी भाषा का इस्तेमाल करते है।
रंगारंग संस्कृति और स्वादिष्ट व्यंजन
बात अगर राजस्थान की हो और हम यहाँ की रंगारंग संस्कृति और स्वादिष्ट व्यंजनों की बात न करें तो राजस्थान का जिक्र अधूरा है । राजस्थान राज्य संस्कृति और परंपराओं में आज भी महान समृद्धि का दावा पेश करता है। जबकि राजस्थान के स्थानीय लोगों के बीच संगीत और नृत्य अभ्यास भी बहुत ही जीवंत और आकर्षक हैं, इन बातों के अलावा ये जगह अपने लाजवाब आर्टवर्क के लिए भी जानी जाती है। यहाँ के पारंपरिक कपड़े बहुत ही कलात्मक होते हैं जिसमें शीशे के काम को देखा जा सकता है। कला और उसके प्रेमियों के लिए राजस्थान एक स्वर्ग से कम नहीं है।
राज्य में मनाये जाने वाले प्रमुख त्योहारों में  होली, तीज, दीपावली, देवनारायण जयंती, संक्रांति और जन्माष्टमी का विशेष महत्त्व है । इसके अलावा, वर्ष में एक बार मनाया जाने वाला राजस्थानी रेगिस्तान त्योहार, ऊंट मेला , और पशु मेला भी राज्य के प्रमुख उत्सवों में अपनी जगह रखते हैं।
राज्य में पानी के आभाव  के चलते आपको यहां ताज़ी सब्जियों में कमी दिखाई देगी।  जिसके चलते प्रायः यहां का मुख्य भोजन शुष्क होता है।  लेकिन इन बातों के बावजूद यहां के भोजन की जितनी तारीफ की जाये उतनी कम है। अगर यहां के पारंपरिक भोजन की बात की जाये तो इसमें दाल भाटी, बेल गट्टे, रबड़ी, बाजरे की रोटी और लहसुन की चटनी मावा कचौड़ी और बीकानेर ने रसगुल्लों को शामिल किया गया है। अगर आप राजस्थान में हैं तो इन भोजनों को खाने में ज़रा भी संकोच मत कीजिये।
जब आप "राजाओं की भूमि" पर हों तो महलों की सैर करना मत भूलिए!
जैसा की हमने आपको राजस्थान के भूगोल, जलवायु और संस्कृति के बारे में सब कुछ बता दिया है, लेकिन अब जो हम आपको बताने वाले हैं वो कुछ ख़ास है अब हम आपको बताएँगे जब आप इस राज्य में हों तो आप कहाँ अपना डेरा डालें। राजस्थान का हर एक भाग पर्यटन की दृष्टि से अपने आप में रॉयल और खूबसूरत है साथ ही यहाँ ऐसा बहुत कुछ है जो आपका मन मोह लेगा। जयपुर, जोधपुर, उदयपुर और बीकानेर जैसे खूबसूरत शहरों को अपने में समेटने वाले इस राज्य में घूमने से नहीं रोक पाएंगे आप। इसके अलावा यहाँ बांसवाड़ा, कोटा, भरतपुर, बूंदी, विराट नगर, सरिस्का और शेखावाटी जैसे भी शहर हैं जो आपकी यात्रा को और भी अधिक रोचक और यादगार बनाएंगे।
प्रकृति प्रेमियों और वन्य जीवन में रूचि रखने वाले लोगों के लिए भी यहाँ बहुत कुछ है। रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान, सरिस्का टाइगर रिजर्व, दरा वन्य प्राणी अभयारण्य और कुम्भलगढ़  वन्यजीव अभयारण्य यहाँ आने वाले प्रकृति प्रेमियों को हर वो चीज़ देते हैं जिनकी उनको चाह रहती है। यहाँ कई सारे हिन्दू और जैन मंदिर के अलावा पूजा पाठ के कई महत्त्वपूर्ण स्थान भी हैं। इतिहास और वास्तु में रूचि रखने वालों को भी ये राज्य बहुत कुछ देता है । राजस्थान में स्थित हर एक महल, हवेली, किला एक उम्दा वास्तुकला को दर्शाता है।
अतः भारत में स्थित राजस्थान राज्य एक यादगार डेस्टिनेशन है यहां आप जरूर आइये यहाँ कोई न कोई ऐसी चीज जरूर होगी जो आपकी यात्रा को यादगार बना देगी। अंत में हम प्रसिद्द लैटिन दार्शनिक और बिशप सेंट ऑगस्टाइन की एक पंक्ति से आपको जरूर अवगत कराना चाहेंगे  " ये दुनिया एक किताब और जो लोग यात्रा नहीं करते उन्होंने अपने जीवन में केवल एक ही पृष्ठ पढ़ा है।"


                          आपणां बडेरा ------------------- आला बंचता नीं आप सुं सूखा कोई रा बाप सुं बडेरां रो काम चालतो अंगूठा री छाप स...